
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवा वर्ग भी अस्वास्थ्यकर खान-पान और तनाव के कारण हृदय रोगों का शिकार हो रहा है। मधुमेह, थायरॉइड और दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे हर साल मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। सरकारी प्रयासों के बावजूद आयुर्वेद सिखाता है कि आपकी रसोई ही सबसे बड़ा औषधालय है।
आयुर्वेद के अनुसार, हृदय रोगों का मूल कारण शरीर में जमा आम (विषाक्त पदार्थ) और मानसिक तनाव है। पैकेज्ड फूड, ज्यादा चीनी और नींद की कमी इसे बढ़ावा देते हैं। लेकिन दालें और फलियां चमत्कारिक लाभ देती हैं। इनमें घुलनशील रेशे प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर धमनियों को साफ रखते हैं।
कोलेस्ट्रॉल की अधिकता से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे हृदय कमजोर हो जाता है। दालों का लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। लोबिया, मसूर, राजमा, मूंग, चना और मोठ विशेष रूप से फायदेमंद हैं।
इन्हें सलाद, सूप, दाल या ब्राउन राइस के साथ लें। ब्राउन राइस में एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर से भी बचाव करते हैं। जीवनशैली में बदलाव लाएं—रेशेदार सब्जियां जोड़ें, तनाव कम करें। रोजाना दालें खाकर आप दिल को स्वस्थ और जवां रख सकते हैं। आयुर्वेद की यह सरल विधि अपनाएं और बीमारियों से दूर रहें।