
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सफेद बाल अब बूढ़ों की निशानी नहीं रहे। 20-30 साल की उम्र में ही युवाओं के सिर पर चांदी जैसे तार चमकने लगे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मेलेनिन नामक पिगमेंट की कमी से होता है, जो बालों का प्राकृतिक रंग बनाए रखता है।
बालों की जड़ों में मौजूद मेलेनोसाइट्स कोशिकाएं मेलेनिन पैदा करती हैं। उम्र बढ़ने पर ये कमजोर पड़ जाती हैं, लेकिन कम उम्र में यह जेनेटिक्स, गलत खानपान और तनाव से तेज हो जाता है। अगर आपके परिवार में जल्दी सफेद बाल हुए, तो खतरा ज्यादा है।
पोषण की कमी बड़ा दोषी है। विटामिन बी12, आयरन, कॉपर और प्रोटीन के अभाव में कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं। शाकाहारी भोजन में यह आम समस्या है। हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, अंडे, बादाम और दालें अपनाएं।
मानसिक तनाव हार्मोन असंतुलन पैदा कर कोशिकाओं को नष्ट करता है। धूम्रपान, शराब, नींद की कमी और फास्ट फूड ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं। प्रदूषण भी जिम्मेदार।
समाधान सरल हैं—संतुलित भोजन, योग, पर्याप्त आराम और बुरी आदतें छोड़ें। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल-सब्जियां लें। सफेद बालों को स्वीकारें या रोकें, लेकिन स्वस्थ जीवन जिएं।