
भारत में डायबिटीज एक महामारी का रूप ले चुकी है। करोड़ों लोग ब्लड शुगर की चपेट में हैं और रोजमर्रा के भोजन को लेकर दुविधा घिरी रहती है। खासकर आलू और शकरकंद को लेकर बहस छिड़ी रहती है—क्या आलू वाकई जहर है या शकरकंद चमत्कारिक दवा? सच्चाई यह है कि डायबिटीज में खाना पूरी तरह त्यागना नहीं, बल्कि समझदारी से चुनना है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स ही इसकी कुंजी है। यह बताता है कि भोजन कितनी तेजी से ग्लूकोज में बदलकर खून में शुगर बढ़ाता है। आलू का जीआई ऊंचा होता है, लेकिन भारत की विभिन्न किस्में अलग-अलग असर दिखाती हैं। कम स्टार्च वाली किस्में धीमी पाचन वाली होती हैं। उबालकर ठंडा किया आलू रेसिस्टेंट स्टार्च बनाता है, जो शुगर स्पाइक रोकता है। तला या मसालेदार आलू ही समस्या पैदा करता है।
शकरकंद इस मामले में आगे है। इसकी फाइबर भरपूर मात्रा शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करती है, जीआई कम रहता है। विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट्स इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाते हैं। आयुर्वेद में इसे पाचन के लिए संतुलित ऊर्जा स्रोत माना गया है।
शोध शकरकंद को बेहतर बताते हैं, लेकिन सीमित मात्रा जरूरी। आलू को सब्जी-दाल संग मिलाकर खाएं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च संतुलित आहार, भाग नियंत्रण और व्यायाम पर जोर देती है। जागरूक चुनाव से डायबिटीज पर काबू पाएं।