
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में खाद्य उत्पादों में मिलावट की शिकायतों की बाढ़ आ गई है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि 7,700 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 6,000 का समाधान हो चुका है। उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
ये शिकायतें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के फूड सेफ्टी कनेक्ट पोर्टल पर आती हैं, जो फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम (एफओएससीओएस) का हिस्सा है। शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारी और खाद्य व्यवसायी को तत्काल सूचना मिल जाती है।
पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि समस्या बढ़ रही है। 2022-23 में 4,330 शिकायतें आईं, 4,074 सुलझीं। 2023-24 में 4,735 हुईं, 3,993 का निपटारा। इस वर्ष 7,705 शिकायतें, 5,952 हल।
राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई करते हैं। एफएसएसएआई उत्पादन से आयात तक मानक तय करता है, जबकि जमीनी प्रवर्तन राज्य अधिकारियों पर। निरीक्षण, नमूना परीक्षण और अभियान चलाए जाते हैं।
राष्ट्रीय वार्षिक निगरानी योजना और जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली प्रभावी हैं। उल्लंघन पर दंड। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।