
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक बेहद गंभीर फैसले में छिंदवाड़ा के जहरीले कफ सिरप मामले में आरोपी फार्मासिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी, उनकी पत्नी ज्योति सोनी और भतीजे की नियमित जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की पूरी परिस्थितियों का गहन विश्लेषण किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस घटना की भयावहता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं। मुख्य आरोप यह है कि फार्मासिस्ट ने डॉक्टर के पर्चे पर लिखी नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप के बदले कॉल्ड्रिफ सिरप दे दिया। कोई बिक्री बिल भी नहीं रखा गया और 66 बोतलों समेत साक्ष्य नष्ट करने का भी आरोप है।
फार्मासिस्ट को दवाओं के सुरक्षित वितरण और जन स्वास्थ्य की रक्षा का जिम्मेदार माना गया है। वहीं डॉक्टर प्रवीण सोनी ने बच्चों को बिना पर्चे कॉल्ड्रिफ सिरप उपलब्ध कराया, जो कानूनन और नैतिक रूप से गलत है। इन उल्लंघनों ने मिलकर यह विपत्ति रची।
कारखाने में बने इस सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकोल की घातक मात्रा पाई गई, जिससे बच्चों में किडनी फेलियर हुआ और 26 से ज्यादा मौतें हुईं। यह हादसा अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच परासिया कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में घटित हुआ। राज्य सरकार ने 4 अक्टूबर 2025 को सिरप पर बैन लगा दिया।
अभियोजन पक्ष ने कमीशन और मुनाफे के लालच का खुलासा किया। आरोपी 13 अक्टूबर 2025 से जेल में हैं। कोर्ट ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 27(अ) और अन्य कानूनी धाराओं में मजबूत साक्ष्य होने का उल्लेख किया।
यह फैसला दवा उद्योग की कमियों को उजागर करता है। जमानत से इंकार केवल प्रक्रियागत है, लेकिन मुख्य मुकदमे पर असर नहीं डालेगा। यह बच्चों की जान जोखिम में डालने वालों के लिए कड़ी चेतावनी है।