
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सेवा दे रहे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए संशोधित स्टाइपेंड को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो जाएगी।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के 2.94 प्रतिशत आधार पर की गई इस वृद्धि से जूनियर डॉक्टरों को आर्थिक सहायता मिलेगी। राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में इन डॉक्टरों की भूमिका अतुलनीय है। वे न केवल पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, बल्कि मरीजों को निरंतर चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री शुक्ला ने कहा कि जूनियर डॉक्टर पूरे समर्पण के साथ कार्यरत रहेंगे। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उनके हितों को प्राथमिकता देते हुए यह संशोधन स्वीकृत किया है।
नई दरें इस प्रकार हैं: प्रथम वर्ष पीजी छात्रों का स्टाइपेंड 75,444 से बढ़कर 77,662 रुपये, द्वितीय वर्ष 77,764 से 80,050 रुपये तथा तृतीय वर्ष 80,086 से 82,441 रुपये। इंटर्न्स को 13,928 से 14,337 रुपये मिलेंगे। सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के छात्रों को सभी वर्षों में 82,441 रुपये निर्धारित।
सीनियर रेजिडेंट का स्टाइपेंड 88,210 से 90,803 रुपये तथा जूनियर रेजिडेंट का 63,324 रुपये किया गया। इससे पूर्व जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था, जिसमें 7 जून 2021 के आदेश को लागू करने की मांग उठी।
10 मार्च को जबलपुर में जेयूडीए प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उपमुख्यमंत्री ने मुद्दा सुलझाया, जिससे हड़ताल समाप्त हो गई। यह कदम युवा चिकित्सकों का मनोबल बढ़ाएगा और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति प्रदान करेगा।