
मेघालय में एचआईवी संक्रमण के मामले चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं। जनवरी 2026 तक 10,293 से ज्यादा मरीज एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) पर हैं। यह जानकारी राज्य विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ए.एल. हेक ने बुधवार को दी।
एनपीपी विधायक मेहताब चांदी संगमा के सवाल पर मंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में 749 मौतें एचआईवी/एड्स से जुड़ी हुई हैं। ईस्ट खासी हिल्स में सबसे अधिक 435, वेस्ट जैंतिया हिल्स में 123 तथा ईस्ट जैंतिया हिल्स में 90 मौतें दर्ज की गईं। अन्य जिलों में अपेक्षाकृत कम मामले हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी मौत सीधे एचआईवी/एड्स से नहीं हुई, बल्कि अवसरवादी संक्रमणों के कारण हुईं। यह वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है, जिससे अन्य बीमारियां घातक साबित होती हैं।
बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए हेक ने कहा कि रोकथाम अधिनियम के तहत गोपनीयता और सहमति अनिवार्य है। बिना इजाजत टेस्टिंग या दवा मजबूरी नहीं हो सकती। कलंक testing और उपचार में प्रमुख बाधा है।
फिर भी, सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अगुवाई में 25 करोड़ रुपये का पांच वर्षीय मिशन शुरू हो रहा है, जो टेस्टिंग, स्टाफ और पहुंच बढ़ाएगा।
वीपीपी विधायक अर्देंट बसियावमोइट के सवाल पर मंत्री ने समुदाय संगठनों के साथ साझेदारी, विधानसभा फोरम और दान की गई वाहन की जानकारी दी। राज्य में 392 आईसीटीसी और चार मोबाइल इकाइयां सक्रिय हैं।
‘एचआईवी अब घातक नहीं, प्रबंधनीय है,’ उन्होंने कहा, जो प्रभावितों को सम्मानजनक जीवन देता है। यह प्रयास महामारी पर काबू पाने की दिशा में मजबूत कदम हैं।