
प्राचीन कथाओं में कहा जाता है कि स्वर्ग से तीन फूल धरती पर उतारे गए—अपराजिता, पारिजात और मधुकामिनी। इनमें मधुकामिनी की सुगंध तो लुभावनी है ही, साथ ही इसके औषधीय गुण स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होते हैं। गर्मियों में फूलों की बहार लाने वाला यह पौधा घर के अंदर आसानी से उगाया जा सकता है। आयुर्वेद में इसके फूल, पत्ते और जड़ें सदियों से उपयोग में लाई जाती रही हैं।
इसकी मनोरम सुगंध तनाव दूर भगाती है और हार्मोन संतुलित रखती है। जड़ का चूर्ण बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है, जो शरीर के लिए उत्तम टॉनिक का काम करता है। पाचन संबंधी समस्याओं जैसे मंदाग्नि में यह चमत्कारिक असर दिखाता है, पेट को हल्का और सक्रिय बनाता है।
गले की खराश या सांस फूलने पर फूलों को उबालकर काढ़ा बनाएं। पत्तों को मिलाकर पीने से सूजन घटती है और श्वसन सुगम होता है। दांत दर्द या मसूड़ों की सूजन में पत्ते चबाने से तुरंत आराम मिलता है, क्योंकि इनमें प्राकृतिक दर्द निवारक तत्व भरे हैं।
परफ्यूम ऑयल से थेरेपी लें तो अनिद्रा की समस्या जड़ से दूर हो जाती है। मानसिक थकान दूर कर गहरी नींद दिलाता है यह तेल। त्वचा की परेशानियों में भी लाभकारी। मधुकामिनी को अपनाकर आप प्राकृतिक स्वास्थ्य की ओर बढ़ सकते हैं—उगाएं, उपयोग करें और फर्क महसूस करें।