
आयुर्वेद की धरोहर में मुलेठी एक ऐसा पौधा है जो सदियों से रोगों पर विजय पा रहा है। इसका वैज्ञानिक नाम ग्लाइसीराइजा ग्लैब्रा है और यह फलीदार परिवार का सदस्य है। मीठे स्वाद वाली इस जड़ को संस्कृत में यष्टिमधु कहा जाता है।
गले की खराश, खांसी और श्वास संबंधी परेशानियों में यह रामबाण है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी तत्व शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। वात-पित्त संतुलन के लिए आदर्श, यह ठंडी तासीर वाली औषधि कफ प्रकृति वालों को सतर्कता से लेनी चाहिए।
हिमालय की गोद में उगने वाली यह बारहमासी बेल सुश्रुत संहिता में नेत्र रोग, त्वचा विकार और कफ-वात दोषों के निवारण के लिए प्रशंसित है। पाचन समस्याओं में सुबह खाली पेट इसका चूर्ण लेने से एसिडिटी, कब्ज और गैस्ट्रिक दूर होती है।
घरेलू नुस्खों में चाय, काढ़ा या पाउडर रूप में उपयोगी, यह आंखों की रोशनी बढ़ाने से लेकर तनाव कम करने तक लाभ देती है। आधुनिक शोध भी इसके ग्लाइसीराइजिन यौगिक की पुष्टि करते हैं जो थकान भगाता है।
मात्रा का ध्यान रखें, अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। गर्भवती महिलाएं चिकित्सक सलाह लें। मुलेठी प्रकृति का मीठा उपहार है जो समग्र स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है।