
आयुर्वेद की अनमोल धरोहर में केवकंद का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। जंगली अदरक के नाम से मशहूर यह पौधा अपनी जड़, तने और पत्तियों में छिपे चमत्कारी गुणों के लिए जाना जाता है। भारत सहित कई देशों में आसानी से उपलब्ध यह जड़ी-बूटी शारीरिक दुर्बलता और जोड़ों के दर्द जैसी परेशानियों का रामबाण इलाज है, लेकिन इसके फायदों से रूबरू कम ही लोग हैं।
केवकंद की कंद वात और कफ दोषों को संतुलित करने में सबसे प्रभावी है। सर्दियों में इसकी सब्जी या सूप बनाकर सेवन करने से शरीर में गर्मी का संचार होता है, जिससे ऊर्जा स्तर बढ़ता है। इसकी तासीर गर्म होने से यह मौसमी कमजोरी को दूर भगाती है।
किडनी स्टोन या कमजोर किडनी की समस्या में इसका काढ़ा अचूक असर दिखाता है। पेशाब में जलन, बूंद-बूंद आना जैसी तकलीफें दूर होती हैं और संक्रमण का खतरा घटता है। बाजार में उपलब्ध चूर्ण सूजन, गठिया दर्द में राहत देता है।
भुने केवकंद में शक्कर-इमली मिलाकर चटनी बनाएं तो पेचिश, दस्त और पाचन विकार ठीक हो जाते हैं। बच्चों के पेट के कीड़ों के लिए शहद में इसका रस मिलाकर दें, तो तुरंत आराम मिलेगा। मधुमेह रोगी भी काढ़ा या पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं।
फिर भी सावधानी बरतें। इसकी गर्म तासीर से अधिकता में जलन हो सकती है। गर्भवती महिलाएं परहेज करें। किसी गंभीर रोग में आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लें। केवकंद प्रकृति का वह उपहार है जो स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।