
कर्नाटक सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए घोषणा की है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत राज्य के सभी जिलों में जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) अगले साल तक स्थापित कर दिए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रकाश कोलिवाड के सवाल पर यह आश्वासन दिया।
ये केंद्र विकासात्मक देरी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की शुरुआती पहचान व उपचार पर केंद्रित होंगे। यहां बाल रोग विशेषज्ञ, नर्सें, हृदय रोग विशेषज्ञ, नेत्र चिकित्सक और आवश्यकता अनुसार मनोवैज्ञानिक उपलब्ध रहेंगे। वर्तमान में राज्य में 17 ऐसे केंद्र कार्यरत हैं, जबकि कोप्पल में शीघ्र एक नया केंद्र शुरू होगा।
मंत्री ने कहा कि कम उम्र में ही बीमारियों का पता लगाना और इलाज कराना बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाता है। कोलिवाड ने रानीबेन्नूर क्षेत्र में दिव्यांग बच्चों के पंजीकरण में भारी अंतर पर प्रकाश डाला। सर्वे के अनुसार राज्य में 6.3 प्रतिशत बच्चे दिव्यांग हैं, लेकिन उनके तालुक में अनुमानित 18,000 के मुकाबले मात्र 137 पंजीकृत हैं।
हावेरी जिले में एक भी डीईआईसी न होने से गरीब परिवार प्रभावित हो रहे हैं। कई बच्चे इलाज के अभाव में सड़कों पर भटकते नजर आते हैं। विधायक ने अपनी दिव्यांग बेटी का जिक्र करते हुए हावेरी के लिए तत्काल मंजूरी, तालुक स्तर पर टेली-थेरेपी, काउंसलिंग और डिजिटल ट्रैकिंग की मांग की।
आरबीएसके से हजारों बच्चों की पहचान हो चुकी है, लेकिन इलाज के लिए उन्हें दूरस्थ शहरों तक जाना पड़ता है। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाएगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ और सक्षम बनेंगी।