
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने रेबीज और जहरीले सांपों के काटने से होने वाली मौतों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने शुक्रवार को राज्य रेबीज उन्मूलन कार्य योजना और सर्पदंश रोकथाम व नियंत्रण योजना जारी कीं। इन योजनाओं का उद्देश्य 2030 तक कुत्तों से होने वाली रेबीज मौतों को पूरी तरह शून्य करना और सांप काटने की घटनाओं से होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाना है।
रेबीज उन्मूलन योजना ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें स्वास्थ्य, पशुपालन, शहरी विकास और शिक्षा विभागों का समन्वय शामिल है। रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो लक्षण दिखने के बाद लगभग हमेशा घातक सिद्ध होती है, इसलिए रोकथाम और तत्काल उपचार अत्यंत आवश्यक हैं।
मंत्री राव ने बताया कि राज्यभर के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, तहसील अस्पतालों और जिला अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सुविधाओं को दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने का सख्त निर्देश दिया गया है।
निजी अस्पतालों को भी स्टॉक बनाए रखने और अग्रिम भुगतान के बिना इलाज प्रदान करने के आदेश हैं। दिसंबर 2022 से रेबीज को अधिसूचनीय बीमारी घोषित कर निगरानी मजबूत की गई है। राज्य और जिला स्तर पर संयुक्त स्टीयरिंग समितियां कार्यान्वयन की निगरानी करेंगी।
रेबीज मुक्त शहर पहल के तहत बेंगलुरु, बेलगावी, बल्लारी, दावणगेरे, हुबली-धारवाड़, कलबुर्गी, मंगलुरु, मैसूर, शिवमोग्गा, तुमकुरु और विजयपुरा में लक्षित अभियान चलाए जा रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण और जनसंख्या प्रबंधन करेगा।
शहरी स्थानीय निकाय पालतू पशुओं का पंजीकरण, टीकाकरण निगरानी और आवारा कुत्तों को रोकने के लिए कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे। चिकित्सा महाविद्यालयों में एंटी-रेबीज क्लीनिक मजबूत हो रहे हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सर्पदंश योजना केंद्र निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें रोकथाम, त्वरित उपचार, क्षमता निर्माण और जागरूकता पर जोर है। 2024 में सर्पदंश को अधिसूचनीय बनाया गया। पीड़ितों को निःशुल्क इलाज मिलेगा।
सरकार ने सभी नागरिकों, निजी संस्थानों और संगठनों से सहयोग की अपील की है ताकि 2030 तक ये लक्ष्य हासिल हो सकें।