
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, भय और नकारात्मक विचारों का बोलबाला है। अनिद्रा, कार्यभार और भविष्य की चिंताएं व्यक्ति को अंदर से खोखला कर रही हैं। आयुष मंत्रालय योग को अपनाने की सलाह देता है, जिसमें काली मुद्रा विशेष रूप से प्रभावी है। यह आसन मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखकर डिप्रेशन जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
काली मुद्रा शरीर को आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। यह मन के भारीपन को दूर करती है, निराशा को कम करती है और आत्मबल बढ़ाती है। मोबाइल और काम के दबाव से जूझते लोगों के लिए यह वरदान साबित हो रही है।
योग ग्रंथों में नाड़ियों का महत्व बताया गया है। सुषुम्ना नाड़ी रीढ़ की मुख्य ऊर्जा मार्ग है। काली मुद्रा इसे शुद्ध कर प्रवाह सुगम बनाती है, जिससे मन शांत होता है और ध्यान साधना आसान पड़ती है।
शारीरिक लाभ में सांस प्रक्रिया का सुधार प्रमुख है। गहरी श्वास फेफड़ों को मजबूत बनाती है, ऑक्सीजन बढ़ाती है और जकड़न मिटाती है। रक्त प्रवाह बेहतर होने से थकान भाग जाती है।
मानसिक रूप से यह एकाग्रता बढ़ाती है, निर्णय क्षमता मजबूत करती है। छात्रों और पेशेवरों के लिए उपयोगी। भावनात्मक संतुलन लाकर डर-गुस्से को नियंत्रित करती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से मूलाधार और मणिपुर चक्र सक्रिय होते हैं, जो साहस और सकारात्मकता जन्म देते हैं।
अभ्यास सरल: सुखासन या ताड़ासन में उंगलियां फंसाएं, तर्जनी ऊपर। धीमी सांस लें-छोड़ें। 2-3 मिनट से शुरू करें। नियमितता से चमत्कार होगा।