बवासीर का रामबाण इलाज: कचनार की जड़ के चमत्कारी गुण
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठे रहना आम बात हो गई है। इससे शारीरिक मेहनत घट गई है और कई रोगों ने दस्तक दे दी है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक बवासीर की शिकायत बढ़ रही है। गंभीर अवस्था...

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठे रहना आम बात हो गई है। इससे शारीरिक मेहनत घट गई है और कई रोगों ने दस्तक दे दी है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक बवासीर की शिकायत बढ़ रही है। गंभीर अवस्था में सर्जरी की सलाह दी जाती है, लेकिन कई बार ऑपरेशन के बाद भी समस्या लौट आती है। कारण यह है कि सर्जरी केवल सतही उपचार करती है, जड़ तक नहीं पहुंचती।
आयुर्वेद में कचनार के वृक्ष को बवासीर के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पुराने कचनार के पेड़ की जड़ों में जबरदस्त औषधीय शक्ति होती है जो मस्सों को जड़ से सुखा देती है। जड़ों को अच्छी तरह सुखाकर चूर्ण बना लें और इसका सेवन करें।
यदि मुंह से लेना न चाहें तो चूर्ण में हल्दी व नारियल तेल मिलाकर लेप तैयार करें। प्रभावित स्थान पर लगाने से मस्से सूखने लगेंगे और पूरी तरह गायब हो जाएंगे। प्रयोग से पहले वैद्य से सलाह अवश्य लें।
कचनार के फूल मधुमेह नियंत्रण में सहायक हैं और छाल अन्य रोगों में लाभकारी। बाजार में आसानी से उपलब्ध यह चमत्कारी वनौषधि आपकी सेहत का खजाना है।


