
भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आमड़ा या जंगल जलेबी एक ऐसा फल है जो विटामिन सी से भरपूर होता है। आंवले के बाद यह सबसे श्रेष्ठ स्रोत माना जाता है। इसकी खट्टी-मीठी स्वाद वाली गोलाकार फलियां न केवल जीभ को भाती हैं बल्कि स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाती हैं। बिहार के ग्रामीण इलाकों में यह पेड़ घर-घर देखने को मिलता है और इसका उपयोग चटनी, अचार व सब्जी के रूप में सदियों से होता आ रहा है।
आमड़ा का पेड़ धीमी गति से बढ़ता है लेकिन इसकी पैदावार भरपूर होती है। फलों में विटामिन सी के साथ आयरन, कैल्शियम, रेशे और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गर्मियों में इसके मौसम के दौरान लोग इसे कच्चा खाते हैं या विभिन्न व्यंजनों में शामिल करते हैं।
आयुर्वेद में आमड़ा को पाचन सुधारक, कब्ज नाशक, भूख बढ़ाने वाला और त्वचा रोगों का निवारक बताया गया है। इसकी पत्तियां, छाल व बीज भी औषधीय गुणों से युक्त हैं। एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं तथा गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
बिहार वन विभाग इसे प्रकृति का अनमोल तोहफा मानता है। गर्मी के दिनों में ताजा आमड़ा उपलब्ध होता है जबकि अचार के रूप में वर्ष भर इसका लुत्फ उठाया जा सकता है। स्वास्थ्य के लिए इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो।