
जम्मू, 5 फरवरी। नशे की लत से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने गुरुवार को विधानसभा में घोषणा की कि मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने वाले विधेयक को मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा।
मंत्री ने सदन को बताया कि नशामुक्ति के नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और इन्हें विधि विभाग को भेज दिया गया है। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए- 2022 से अब तक 49,276 नशे के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें जम्मू में 32,517 और कश्मीर में 16,759 शामिल हैं।
एनसी विधायक तनवीर सादिक द्वारा पहले पेश किए गए निजी विधेयक का जिक्र करते हुए इटू ने कहा कि उसमें स्कूलों में नशे के दुष्प्रभाव पढ़ाने का प्रावधान था, जिसे सरकारी आश्वासन पर वापस ले लिया गया था। अब सरकार खुद इस दिशा में सक्रिय है।
केंद्र सरकार के संसदीय आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में करीब 10 लाख लोग नशे का शिकार हैं, जो कुल आबादी का 8 प्रतिशत है। 2023 की एक रिपोर्ट में 13.50 लाख उपयोगकर्ताओं का अनुमान लगाया गया, ज्यादातर 18-75 वर्ष आयु वर्ग के।
यह विधेयक नशामुक्ति को मजबूत बनाएगा, सख्त नियंत्रण लाएगा और पुनर्वास सुविधाओं को बढ़ावा देगा। क्षेत्र में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच यह कदम सराहनीय है, जो समाज को नई दिशा दे सकता है।