
नई दिल्ली। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने, इसे अधिक न्यायसंगत और विकास-केंद्रित बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इससे न केवल लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि पृथ्वी की रक्षा भी होगी।
सोशल मीडिया एक्स पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के पोस्ट का जवाब देते हुए जोशी ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा ठोस नीतियों, महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और समावेशी दृष्टिकोण पर टिकी हुई है।
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का व्यापक विस्तार कर रहे हैं, साथ ही उद्योगों, रोजगार और नवाचार को नई गति प्रदान कर रहे हैं।’
गुटेरेस ने भारत की सराहना करते हुए कहा था कि यह देश साबित कर रहा है कि स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और औद्योगिक प्रगति एक साथ हो सकती है। उन्होंने अपील की, ‘आइए जलवायु चुनौतियों को विकास के अवसरों में बदलें और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को लोगों व धरती के हित में तेज़ करें।’
भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक पटल पर अग्रणी बनता जा रहा है। 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत कमी, गैर-जीवाश्म ऊर्जा से 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन और 2.5-3 अरब टन कार्बन सिंक के लक्ष्य निर्धारित हैं।
देश ने जलवायु कार्रवाई के अपने राष्ट्रीय योगदानों के लगभग दो-तिहाई लक्ष्यों को निर्धारित समय से चार वर्ष पूर्व हासिल कर लिया है।
दूसरी ओर, राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में गुटेरेस ने एआई विकास में विभाजनकारी प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने वैश्विक परस्पर संचालनीयता मानकों की आवश्यकता बताई।
‘अंतरराष्ट्रीय सहयोग कठिन हो गया है। तकनीकी होड़ बढ़ रही है, जिससे यदि साझा आधार न बने तो नीतियां और मानक बंट जाएंगे,’ उन्होंने आगाह किया।
सिस्टम जांच और जोखिम मूल्यांकन पर सहमति से तालमेल संभव है। गुटेरेस ने विज्ञान-आधारित एआई नियामकों की मांग की, जो सुरक्षा सुनिश्चित करें और नवाचार को प्रोत्साहित करें। ये नियम विश्वास जगाएं और व्यवसायों को स्पष्टता दें।