
नई दिल्ली। सिरदर्द होने पर ज्यादातर लोग दर्द निवारक गोलियां खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या सिर में नहीं, बल्कि पेट और पाचन तंत्र की खराबी से उपजती है। कब्ज, गैस या एसिडिटी ही सिरदर्द के प्रमुख कारण साबित हो सकते हैं।
महर्षि सुश्रुत की ‘सुश्रुत संहिता’ में वर्णित है कि वात, पित्त और कफ दोषों का असंतुलन पाचन से शुरू होकर सिर तक पहुंचता है। तीखा-तला या अम्ल-dominant भोजन पित्त को भड़काता है, जो रक्त वाहिकाओं से होकर मस्तिष्क में जलन, भारीपन और नेत्र पीछे दर्द उत्पन्न करता है। इसे अक्सर माइग्रेन मान लिया जाता है। कब्ज से मल-मूत्र के विषाक्त पदार्थ रक्त को प्रदूषित कर मगज को प्रभावित करते हैं।
नस्य कर्म से देशी घी की बूंदें नाक में डालने से पित्त शांत होता है और नाड़ियां पोषित। एसिडिटी पर धनिया भिगोकर मिश्री युक्त जल उत्तम। कब्ज-गैस में अविपत्तिकर चूर्ण और सोंठ का लेप कारगर। रात के भारी भोजन, ठंडे-बासी आहार से परहेज करें। पेनकिलर का अधिक सेवन न करें।
आधुनिक अध्ययन पेट-मस्तिष्क संबंध की पुष्टि करते हैं। स्वस्थ पेट से सिरदर्द भागेगा। इन आयुर्वेदिक उपचारों से स्थायी लाभ लें।