
गुस्सा मानव स्वभाव का हिस्सा है, जो कभी प्रेरणा देता है तो कभी अनियंत्रित होकर जानलेवा साबित होता है। लंबे समय तक बेकाबू क्रोध हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मानसिक परेशानियों को जन्म देता है। आयुर्वेद में इसे पित्त-कफ दोष के असंतुलन का प्रतीक माना गया है, जो शरीर-मन दोनों को नुकसान पहुंचाता है।
जब क्रोध चढ़ता है, हृदय गति तेज हो जाती है। तत्काल सांस नियंत्रण अपनाएं: आंखें बंद कर चार सेकंड सांस लें, सात सेकंड रोकें, आठ में छोड़ें। यह विधि तंत्रिका तंत्र को स्थिर कर भावुकता से तर्क की ओर ले जाती है।
शरीर गर्म होने पर ठंडा पानी धीरे पिएं। यह शीतलता प्रदान कर मस्तिष्क को शांत करता है, आयुर्वेद की जल-चिकित्सा की तरह।
विवाद से बचें, शांत स्थान पर थोड़ी देर चुप रहें। इससे गुस्सा कम होता है और सोच स्पष्ट होती है।
हल्दी दूध, अश्वगंधा, तुलसी का सेवन करें। तुलसी चाय या पत्ते मन को सुकून देते हैं। नियमित अनुलोम-विलोम, कपालभाति प्राणायाम पित्त को संतुलित रखते हैं। इन आदतों से क्रोध पर विजय पाएं और स्वस्थ जीवन जिएं।