
मुंबई की प्रमुख फार्मा कंपनी सिप्ला ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के बेहद कमजोर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा 54.6 प्रतिशत घटकर 554.64 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1,221.84 करोड़ रुपये था। इस गिरावट का मुख्य कारण सहयोगी कंपनियों पर लगाया गया भारी इम्पेयरमेंट चार्ज रहा।
ऑपरेशंस से होने वाली आय में भी 2.8 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज हुई, जो 6,541.20 करोड़ रुपये पर सिमट गई। पिछले वर्ष यह 6,729.69 करोड़ रुपये थी। ईबीआईटीडीए 38 प्रतिशत लुढ़ककर 955 करोड़ रुपये पर पहुंचा, जबकि मार्जिन 22.8 प्रतिशत से घटकर 14.6 प्रतिशत रह गया।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि बाजार की बदलती परिस्थितियों के चलते 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में सहयोगी इकाइयों पर 42.02 करोड़ रुपये का इम्पेयरमेंट दर्ज किया गया। इस प्रभाव को हटाने पर ईबीआईटीडीए 997 करोड़ रुपये और मार्जिन 15.2 प्रतिशत होता।
हालांकि, बोर्ड ने वित्त वर्ष के लिए प्रति शेयर 13 रुपये का अंतिम लाभांश घोषित करने की सिफारिश की है। शेयरधारकों की मंजूरी के बाद एजीएम के 30 दिनों के अंदर भुगतान होगा। रिकॉर्ड डेट 5 जून 2026 तय की गई है।
नतीजों के बाद सिप्ला के शेयरों में 3.5 प्रतिशत की तेजी आई और दोपहर 2:40 बजे एनएसई पर 1,338.10 रुपये के स्तर पर कारोबार हो रहा था। यह उछाल कंपनी की मजबूत बुनियादी स्थिति और डिविडेंड नीति को दर्शाता है। फार्मा क्षेत्र की चुनौतियों के बावजूद सिप्ला की अमेरिकी बाजार और जेनेरिक दवाओं पर निर्भरता इसे लंबी दौड़ में मजबूत बनाती है।
