
हॉलीवुड अभिनेता रॉबर्ट कैराडाइन की 71 वर्ष की उम्र में आत्महत्या ने दुनिया को हिला दिया। परिवार के अनुसार, वे लंबे समय से बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, यह गंभीर मानसिक विकार दुनिया भर में 3.7 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है।
बाइपोलर डिसऑर्डर मूड के चरम उतार-चढ़ाव वाली स्थिति है। उन्माद के दौर में व्यक्ति अत्यधिक ऊर्जावान, उत्साहित या चिड़चिड़ा हो जाता है। तेज बोलना, कम सोना, जोखिम भरे निर्णय लेना आम है। कभी-कभी भ्रम भी घेर लेते हैं।
अवसाद के चरण में गहरी उदासी, थकान, रुचि की कमी, नींद-भूख में गड़बड़ी, अपराध बोध और आत्महत्या के ख्याल सताते हैं। ये लक्षण हफ्तों-महीनों तक बने रह सकते हैं। यह बीमारी रिश्तों, करियर और स्वास्थ्य को चोट पहुंचाती है। नशे की लत और शारीरिक रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
पुरुष-महिलाओं में बराबर पाई जाने वाली यह समस्या कामकाजी उम्र वालों को ज्यादा चपेट में लेती है। गलत डायग्नोसिस, अपर्याप्त इलाज और सामाजिक कलंक बड़ी बाधाएं हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, सही उपचार से सामान्य जीवन संभव है।
मूड स्टेबलाइजर दवाएं जैसे लिथियम उन्माद-अवसाद को काबू करती हैं। संज्ञानात्मक चिकित्सा, पारिवारिक काउंसलिंग लक्षणों को कम करती हैं। नियमित व्यायाम, नींद, पौष्टिक भोजन और तनाव नियंत्रण जरूरी हैं। परिवार व सहायता समूहों का साथ रिकवरी तेज करता है।
समाज को कलंक मिटाना होगा। समय पर मदद उपलब्ध हो तो बाइपोलर पीड़ित सुखी जीवन जी सकते हैं। कैराडाइन की मौत एक सबक है – मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।