
आज की भागमभाग भरी जिंदगी में योग का महत्व बढ़ता जा रहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा प्रचारित पूर्ण भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ ही फेफड़ों और हृदय स्वास्थ्य के लिए रामबाण साबित हो रहा है।
यह आसन न केवल पीठ को मजबूत करता है बल्कि श्वसन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और हृदय को ऊर्जा प्रदान करता है। रोजाना अभ्यास से आपका समग्र स्वास्थ्य चमक उठेगा।
विधि सरल है—पहले सामान्य भुजंगासन में आइए, सामान्य सांस लें। घुटनों को मोड़ें, पंजे ऊपर उठाएं। सिर-गर्दन-कंधों को पीछे खींचें और तलवों से सिर छूने की कोशिश करें। कुछ पल रुकें, फिर धीरे लौटें। शिथिल होकर लेटें और सांस-नाड़ी सामान्य करें।
सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त में खाली पेट, या शाम को भोजन के 4-5 घंटे बाद। नियमितता से रीढ़ सशक्त होती है, पेट की चर्बी कम होती है, पाचन सुधरता है, पीठ दर्द भागता है, तनाव दूर होता है और रक्त संचार बढ़ता है।
शुरुआत में गुरु मार्गदर्शन जरूरी, गलत विधि से चोट का डर। इसे अपनाएं और स्वस्थ जीवन जिएं।