
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित खान-पान और तनावपूर्ण दिनचर्या के कारण हाइपर एसिडिटी एक सामान्य समस्या बन गई है। पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अधिकता से छाती में जलन, खट्टी डकारें, मुंह में खट्टापन, उल्टी जैसा मन होना और गैस की तकलीफ आम हो जाती है।
मसालेदार तला-भुना खाना, लंबे समय तक भूखा रहना, धूम्रपान, शराब और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। आयुर्वेद में इसे अम्लपित्त कहा जाता है, जिसे साधारण उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है। आयुष मंत्रालय ने बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए एक सरल आयुर्वेदिक मार्गदर्शिका जारी की है, जो दैनिक आदतों में सुधार पर जोर देती है।
जब पेट का अम्ल असंतुलित हो जाता है, तो ऊपरी पेट में भारीपन, बेचैनी और मतली जैसी शिकायतें उभरती हैं। इन लक्षणों को समय रहते पहचानकर जीवनशैली बदली जा सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि भारी-मसालेदार, खट्टे भोजन से परहेज करें, जंक फूड न खाएं। छोटे-छोटे भोजन नियमित अंतराल पर लें। रोज 8-10 गिलास पानी पिएं। रात को जल्दी सोएं और तनाव दूर करने के लिए योग, प्राणायाम या टहलना अपनाएं। धूम्रपान-शराब बंद करें।
ये बदलाव न केवल एसिडिटी कम करते हैं, बल्कि आंतों के स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाते हैं। बार-बार परेशान होने वालों के लिए ये उपाय वरदान हैं। गंभीर स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें।