
शहरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण साइनस और सांस की परेशानियां आम हो गई हैं। आयुष मंत्रालय ने इनसे निपटने के लिए प्राचीन जलनेति क्रिया की सिफारिश की है। यह सरल विधि नाक के रास्तों को पूरी तरह साफ कर श्वास को सुगम बनाती है और दिमागी स्पष्टता भी प्रदान करती है।
जलनेति योग की शुद्धिकरण तकनीकों में प्रमुख है। इसमें नेति पॉट से गुनगुने नमक वाले पानी को एक नासिका से डालकर दूसरी से निकाला जाता है। इससे धूल, प्रदूषक और एलर्जी कारक बाहर हो जाते हैं।
विधि अपनाने के लिए कागासन में बैठें, सिर हल्का झुकाएं। सक्रिय नासिका में पॉट की टोंटी रखें, मुंह से सांस लें। आधा पॉट खाली होने पर स्विच करें। अंत में कपालभाति से बची नमी हटाएं।
फायदे गजब के हैं—साइनसाइटिस, जुकाम, अस्थमा में आराम, सिरदर्द कम, आंखों की रोशनी तेज। मानसिक तनाव घटता है। सावधानी बरतें: पानी उचित गर्म, नमक सटीक (आधा चम्मच प्रति लीटर), शुरुआत में गुरु मार्गदर्शन में।
प्रदूषण युग में जलनेति दैनिक रूटीन का अभिन्न अंग बने। आयुष इसे प्राकृतिक रक्षा कवच के रूप में प्रचारित कर रहा है, जो स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।