
आज की भागमभाग भरी जिंदगी में नहाना महज सफाई का काम बन गया है। लेकिन आयुर्वेद इसे एक पवित्र संस्कार मानता है जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है। नियमित स्नान से पाचन ताकत बढ़ती है, थकान मिटती है, मन हल्का होता है और रक्त संचार सुचारू रहता है।
स्नान शरीर की आग्नि को संतुलित रखता है, जो चयापचय को बेहतर बनाता है। पानी के स्पर्श से खून का प्रवाह तेज होता है और पाचन क्रिया सक्रिय हो जाती है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से साबित हुआ है कि स्नान तनाव कम करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को घटाता है और सुखद एंडोर्फिन बढ़ाता है। अच्छी नींद के लिए गुनगुने पानी का स्नान रामबाण है। नींद न आने पर पैरों को गुनगुने पानी में भिगोएं।
आयुर्वेद में स्नान के तीन मुख्य नियम हैं। पहला, अभ्यंग – नहाने से 15 मिनट पहले तेल से पूरी मालिश। दूसरा, उबटन लगाएं जो साबुन से कहीं बेहतर त्वचा को निखारता है। तीसरा, स्नान के दौरान मंत्र जपें जो सकारात्मक ऊर्जा भरता है।
इन स्टेप्स को अपनाकर स्नान को स्वास्थ्य का स्रोत बनाएं। आयुर्वेद की यह विद्या जीवन को तरोताजा रखेगी।