
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चिंता एक आम समस्या बन चुकी है। लोग इसे महज ओवरथिंकिंग समझते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच गहरा संबंध इसकी जड़ में है।
कामकाजी दबाव, अनियमित नींद और खराब खान-पान से शरीर और मन दोनों थकान महसूस करते हैं। शारीरिक बीमारियों पर तो ध्यान दिया जाता है, लेकिन मानसिक परेशानियां धीरे-धीरे अंदर से कमजोर कर देती हैं। सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित हो जाती है। इनकी समझ जरूरी है, क्योंकि इनका आधार पेट और दिमाग में छिपा है।
चिंता केवल मानसिक नहीं, शारीरिक भी है। तनाव के हार्मोन बढ़ने से बेचैनी, तेज दिल की धड़कन और सांस लेने में तकलीफ होती है। लंबे समय का स्ट्रेस नर्वस सिस्टम बिगाड़ देता है। नींद की कमी चिंता को और बढ़ाती है।
मस्तिष्क के खतरे का सेंसर बिना वजह सक्रिय हो जाता है। घबराहट, पेट में गड़बड़ और हृदय गति तेज हो जाती है। बार-बार ऐसा होने पर स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं, बिना कारण बेचैनी सताती है।
पाचन तंत्र भी बड़ा कारक है। सही पाचन न हो तो पोषक तत्व कम मिलते हैं। उदासी, शारीरिक कमजोरी और नींद न आना आम हो जाता है। अधूरी नींद से सिरदर्द और थकान बढ़ती है, मन-तन दोनों प्रभावित।
समाधान में मन पर काबू जरूरी। छोटी बातों से घबराना बंद करें। प्रकृति में समय बिताएं, पसंदीदा भोजन लें। मन को अपने वश में करें, स्वयं को नहीं। जागरूकता से चिंता पर विजय पाएं।