
आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में मिलावटी दूध से उत्पन्न संकट ने चार जिंदगियां लील ली हैं और सात लोग अभी भी गंभीर हालत में भर्ती हैं। स्वास्थ्य आयुक्त वीरापांडियन ने मंगलवार को बताया कि कुल 15 मरीज अस्पतालों में इलाजरत हैं, जिनमें दो बच्चे भी हैं—इनमें पांच माह का एक शिशु शामिल है।
तीन मरीज वेंटिलेटर पर हैं, दो डायलिसिस ले रहे हैं, जबकि तीन को दोनों सुविधाएं दी जा रही हैं। वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट रविराज की सिफारिश पर किडनी सुधारने वाली विशेष दवाएं चेन्नई व मुंबई से मंगाई जा रही हैं।
16 फरवरी को वितरित दूध में कूलिंग मशीन से एथिलीन ग्लाइकॉल लीक होने की आशंका है। यूरिया नहीं मिला, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह लंबे उपयोग से नुकसान पहुंचाता है, जबकि ग्लाइकॉल तीन-चार दिनों में असर दिखाता है।
110 परिवारों के 315 लोगों के ब्लड सैंपल में तीन असामान्यताएं पाई गईं—सभी भर्ती और स्थिर। प्रभावित इलाकों में एक माह तक 24×7 डॉक्टर तैनात।
दही, घी, सिरका के सैंपल हैदराबाद व काकीनाडा लैबों में भेजे गए। विक्रेता गिरफ्तार, मैकेनिक से पूछताछ। बुधवार से राज्यव्यापी दूध नमूने अभियान शुरू। यह घटना खाद्य सुरक्षा की पोल खोलती है।