
आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी जिले में दूध में जहर मिलाने से फैली तबाही थमने का नाम नहीं ले रही। पांच लोगों की मौत के बाद भी 15 प्रभावित छह अस्पतालों में भर्ती हैं, जहां उनका गहन इलाज जारी है। गुरुवार को अधिकारियों ने स्थिति पर पूरी जानकारी साझा की, जो अब नियंत्रण में बताई जा रही है।
यह विपत्ति 16 फरवरी को शुरू हुई जब पहला मरीज भर्ती हुआ। 24 फरवरी तक 20 लोग अस्पताल पहुंचे, जिनमें से पांच की जान चली गई। इनमें छह साल का मासूम बच्चा और 70 वर्ष से अधिक उम्र के तीन बुजुर्ग शामिल हैं। लक्षणों में पेशाब बंद होना, उल्टी, पेट दर्द और किडनी फेलियर प्रमुख थे।
जांच में खून में यूरिया व क्रिएटिनिन की भारी वृद्धि मिली, जो विषाक्त पदार्थ की ओर इशारा करती है। निशाना बना नरसापुरम गांव की वरलक्ष्मी मिल्क डेयरी, जो 106 परिवारों को दूध सप्लाई कर रही थी। सप्लाई तत्काल रोकी गई।
नौ मेडिकल टीमें 110 परिवारों के 307 सदस्यों की जांच कर चुकीं। 14 फील्ड टीमों ने 679 घरों का दौरा किया। 315 ब्लड सैंपल और अन्य नमूनों की जांच आईआईटी तिरुपति, जेएनटीयू काकीनाडा व हैदराबाद लैब में हो रही है। केवल दो मामलों में मामूली अनियमितता मिली, जो दूध से जुड़ी नहीं।
मरीजों की हालत गंभीर है—एक वेंटिलेटर पर, छह डायलिसिस ले रहे, आठ को दोनों की जरूरत। पुलिस ने विक्रेता अड्डाला गणेश्वरराव (33) को गिरफ्तार किया। पशु चिकित्सक 41 दूध नमूने जांच रहे। स्वास्थ्य आयुक्त व खाद्य सुरक्षा निदेशक निगरानी में हैं। जांच पूरी होते ही कड़ी कार्रवाई होगी।