
डायबिटीज मेलिटस एक गंभीर चयापचय संबंधी विकार है, जिसमें खून में ग्लूकोज की मात्रा लगातार ऊंची बनी रहती है। इंसुलिन की कमी या उसके अप्रभावी उपयोग के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे अपने शरीर के इन संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय रहते सतर्क हो जाएं।
मंत्रालय के मुताबिक, डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों को ‘तीन पी’ के रूप में जाना जाता है – पॉलीयूरिया, पॉलीडिप्सिया और पॉलीफेजिया। इनकी जल्द पहचान से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
पॉलीयूरिया का मतलब है बार-बार पेशाब आना। अधिक शुगर के कारण गुर्दे उसे बाहर निकालने के लिए ज्यादा मूत्र बनाते हैं। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन होता है।
पॉलीडिप्सिया में अत्यधिक प्यास लगती है। लगातार पेशाब से पानी की कमी हो जाती है, जिससे प्यास बनी रहती है।
पॉलीफेजिया यानी बहुत ज्यादा भूख लगना। ग्लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए भूख बढ़ती है लेकिन वजन घटता चला जाता है।
इनके साथ अस्पष्ट वजन घटना, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसे में तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट कराएं।
समय पर नियंत्रण से हृदय रोग, किडनी फेलियर, आंखों की खराबी और नसों को नुकसान से बचा जा सकता है। संतुलित भोजन, व्यायाम, दवाएं और आयुष की आयुर्वेदिक विधियां प्रभावी हैं। नियमित जांच से डायबिटीज को अच्छे से संभाला जा सकता है।