
नई दिल्ली। स्वस्थ रहने का मूल मंत्र है स्वच्छ पेट। जब पाचन तंत्र ठीक रहता है, तो शरीर हल्का, ऊर्जा से भरपूर और मन प्रसन्न रहता है। कब्ज सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन जैसी कई परेशानियां पैदा कर देता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित योग से पाचन मजबूत होता है और कब्ज की जड़ उखड़ जाती है।
वे नौ चुनिंदा योगासनों और प्राणायाम की सलाह देते हैं। अग्निसार, कपालभाति, सूर्य नमस्कार, पादहस्तासन, मंडूकासन, पश्चिमोत्तानासन, वक्रासन, पवनमुक्तासन और भस्त्रिका इनमें प्रमुख हैं। ये सरल आसन खाली पेट घर पर किए जा सकते हैं। ये पेट की गहन मालिश करते हैं, जठराग्नि प्रज्वलित करते हैं तथा गैस-फूलने जैसी विकृतियों को समाप्त कर देते हैं।
रोजाना अभ्यास से कब्ज के साथ समग्र स्वास्थ्य और मानसिक शांति सुनिश्चित होती है। कब्ज का कारण पाचन कमजोरी, गड़बड़ खान-पान और तनाव है। योग सभी को दूर करता है।
अग्निसार क्रिया में सांस बाहर निकालकर पेट को तेजी से अंदर-बाहर किया जाता है। इससे आंतरिक अंग सक्रिय होते हैं, पेट की चर्बी घटती है और भूख नियंत्रित रहती है।
कपालभाति में तीव्र सांस त्याग से पेट मांसपेशियां जागृत होती हैं। आंत्र गति बढ़ती है, गैस समाप्त होती है। 3-5 मिनट रोज से पेट हमेशा साफ।
सूर्य नमस्कार की 12 क्रांतियां सम्पूर्ण शरीर को लाभान्वित करती हैं, विशेषकर पाचन को। 5-10 चक्र से पेट हल्का।
पादहस्तासन में खड़े होकर आगे झुककर पैर छूएं। आंतें उत्तेजित, गैस बाहर, रीढ़ लचीली।
मंडूकासन में घुटने मोड़कर पेट दबाएं। अंग मालिश, अग्नि वृद्धि, अम्लता दूर।
पश्चिमोत्तानासन पीठ-पेट खींचता है, कब्ज भगाता है, कमर दर्द कम।
वक्रासन ट्विस्ट से गैस-कब्ज समाप्त, लचीलापन।
पवनमुक्तासन में घुटने छाती से लगाएं, गैस निकले, तत्काल राहत।
भस्त्रिका तेज सांस से ऊर्जा बढ़े, पाचन तेज। इनसे जीवन सुखमय बने।