
महिलाओं के लिए गर्भाशय सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो हार्मोन संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है। किसी भी समस्या से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है, थायरॉइड, मोटापा, सिस्ट, अनियमित माहवारी और बांझपन जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही इसकी देखभाल पर जोर देते हैं।
रात सोने से पहले शांत वातावरण बनाएं। हल्की रोशनी में मन को स्थिर करें। नींद के दौरान शरीर विषाक्त पदार्थ बाहर निकालता है और गर्भाशय की मरम्मत करता है, जिससे हार्मोन संतुलित रहते हैं।
माहवारी के समय गर्भाशय पर गर्म पानी की बोतल से सिकाई करें, हफ्ते में दो बार। इससे मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं, दर्द और सूजन घटती है, तथा प्रजनन क्षमता मजबूत होती है।
खाने के बाद वज्रासन में बैठें और सांसों पर ध्यान दें। इससे पाचन ऊर्जा गर्भाशय तक पहुंचती है, गंदगी साफ होती है और रक्त संचार बेहतर होता है।
रोज रात को बादाम या जैतून तेल से निचली पीठ और पेल्विक क्षेत्र की हल्की मालिश करें। गोलाकार गति से रक्त प्रवाह बढ़ता है, तनाव कम होता है और गर्भाशय स्वस्थ रहता है। इन उपायों से महिलाएं स्वस्थ प्रजनन जीवन जी सकती हैं।