
चार मार्च को रंगों की होली पूरे जोश के साथ मनाई जाएगी। हिंदी सिनेमा का होली से गहरा नाता है, जहां 1950 के दशक से भक्ति भरे गीतों ने जगह बनाई। जोगन फिल्म का ‘डारो रे रंग डारो रे रसिया’ गीता दत्त की आवाज में और मदर इंडिया का ‘होली आई रे कन्हाई’ शमशाद बेगम व लता मंगेशकर द्वारा अमर हो गया। लेकिन सबसे चर्चित होली गाना ‘अरे जा रे हट नटखट’ फिल्म नवरंग की अनसुनी कहानी जान लीजिए।
1959 की नवरंग के निर्देशक वी. शांताराम ने इस गाने को अनोखा बनाने के लिए संध्या से हाथी संग नृत्य करवाया। इनडोर शूटिंग में तकनीकी चुनौतियां थीं, फिर भी संध्या ने हामी भरी। पहले उन्होंने हाथी से दोस्ती गांठी—हाथ से खिलाया, पानी पिलाया, घंटों साथ बिताए।
शूटिंग दिन संध्या बिना डरे हाथी के ताल पर थिरकीं। खासियत यह कि गाने में मेल लीड नहीं था, संध्या ने ही आधी औरत-आधा मर्द का किरदार निभाया। क्लासिकल डांस से गाना इतना यादगार बना कि आज भी होली इसी के बिना फीकी। आशा भोंसले-महेंद्र कपूर की जोड़ी ने इसे संगीतमय बना दिया। यह फिल्म सिनेमा की साहसी कोशिशों का प्रतीक है।