
दिल्ली के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया विश्वविद्यालय के रोबोटिक कुत्ते ने हंगामा मचा दिया। इसे अपनी उपलब्धि बताने वाली यूनिवर्सिटी का दावा चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स के उत्पाद निकला। स्टॉल हटवाया गया और माफी मांगी गई। फिल्ममेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इसे भारतीय शिक्षा और नवाचार की पोल खोलने वाला बताया।
उनका कहना है कि यह रोबोट का मुद्दा नहीं, सोच का है। तकनीक आयात करना ठीक है, लेकिन उसे अपना बताना जल्दबाजी और हीनभावना दर्शाता है। निजी विश्वविद्यालय राजनीति-व्यापार से बंधे हैं, जहां पढ़ाई कमाई का धंधा, कैंपस इवेंट स्पॉट और शोध महज दिखावा। एआई जैसी शक्ति को ब्रोशर की सजावट बना दिया गया है।
प्राचीन नालंदा-तक्षशिला की याद दिलाते हुए अग्निहोत्री कहते हैं कि वहां बहस और खोज को बढ़ावा मिलता था। आज हम विश्वसनीयता जला रहे हैं। अमेरिका-चीन मूल मॉडल बना रहे, भारत फ्रेमवर्क पर अटका। ‘आज का खिलजी कौन—बाहरी या तमाशा पसंद सिस्टम?’
सुझाव देते हुए उन्होंने कहा, यूनिवर्सिटी को राजनीति से अलग करें, शोध स्वायत्तता को कानूनी संरक्षण दें। एआई को स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा में उतारें। पहली ट्रेन छूट गई, लेकिन असली कदम उठाने का मौका बाकी है।