
बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में स्टार बनने की होड़ ने कई युवा कलाकारों के सपनों को चूर-चूर कर दिया है। ऐसी ही कहानी है विवान शाह की, जो अभिनय के दिग्गज नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह के बेटे हैं। विवान का सफर शुरू तो जोरदार हुआ, लेकिन जल्द ही महत्वाकांक्षा और लालच ने उनके करियर को डगमगा दिया।
‘हैप्पी न्यू ईयर’ और ‘शांडार’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाई, लेकिन विवान ने स्टारडम की चाहत में गलत रास्ता चुन लिया। वे बड़े बैनर की फिल्मों के पीछे भागे, छोटे-मोटे अच्छे रोल ठुकराए। निर्देशकों से झगड़े, अनावश्यक डिमांड्स—ये सब ने इंडस्ट्री में उनकी छवि खराब कर दी। 2017 तक आते-आते काम बंद हो गया। उदास और निराश विवान घर लौटे।
तब उनके माता-पिता ने कमाल कर दिखाया। नसीरुद्दीन ने साफ कहा, ‘अभिनय कला है, दौड़ नहीं।’ रत्ना ने भावुक होकर समझाया कि असली सफलता धैर्य से आती है। उन्होंने विवान को थिएटर की ओर मोड़ा, जहां शाह परिवार की जड़ें हैं। नाटकों में काम करते हुए विवान ने खुद को निखारा।
परिणाम सबके सामने है। ‘मिस लवली’, ‘बेगम जान’ और हाल की ‘डार्लिंग्स’ में उनका अभिनय सराहा गया। आज विवान संतुलित करियर जी रहे हैं—फिल्में, ओटीटी, थिएटर। यह कहानी सिखाती है कि माता-पिता की सलाह जिंदगी बदल सकती है। लालच छोड़ो, कला अपनाओ—विवान शाह इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।
