
मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में वरुण ग्रोवर का नाम एक प्रेरणा के रूप में चमकता है। 26 जनवरी 1980 को सुंदरनगर में जन्मे इस बहुमुखी कलाकार ने सिविल इंजीनियरिंग की सुरक्षित नौकरी छोड़कर सपनों की उड़ान भरी। सेना में इंजीनियर पिता के कारण उनका बचपन देश के कोने-कोने में गुजरा, जो लचीलापन सिखाता गया।
आईआईटी बीएचयू से ग्रेजुएशन के बाद पुणे की सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम किया, लेकिन एकरसता ने झकझोर दिया। इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ’20 साल बाद अपनी जिंदगी सीनियर्स जैसी देख पा रहा था—एक जैसी गाड़ियां, घर, बच्चे। मैं ऐसी जिंदगी नहीं चाहता था।’ परिवार के सहयोग से मुंबई पहुंचे।
स्कूल-कॉलेज से कविताएं लिखने का शौक था। लेखकों के सत्रों से कॉमेडी में पहचान बनी। ‘मसान’ और ‘संदीप और पिंकी फरार’ की कहानियां लिखीं। ‘ऑल इंडिया रैंक’ निर्देशित की। गीतकार के रूप में ‘मोह-मोह के धागे’ पर नेशनल अवॉर्ड जीता। ‘शौक’, ‘ये एक जिंदगी’, ‘नजर तेरी तूफान’, ‘जबरा फैन’ जैसे हिट गाने रचे।
आज वरुण सफल स्टैंड-अप आर्टिस्ट, लेखक और गीतकार हैं। उनकी कहानी बताती है कि जुनून की राह में हिम्मत ही सबसे बड़ा हथियार है। सपने देखने वालों के लिए यह एक मिसाल है।