
नब्बे के दशक की चहेती अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने ‘दूध का कर्ज’ और ‘तिरंगा’ जैसी सुपरहिट फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता। लेकिन उनकी सबसे यादगार भूमिका बी.आर. चोपड़ा के धारावाहिक ‘महाभारत’ में उत्तरा की थी, जो संयोग मात्र से मिली और बिना किसी स्क्रीन टेस्ट के।
28 फरवरी 1968 को गोवा में जन्मीं वर्षा के पिता ए.के.एस. उसगांवकर गोवा विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष रहे। उन्होंने मराठी रंगमंच से सफर शुरू किया और जल्दी ही मराठी सिनेमा में छा गईं। लेकिन ‘महाभारत’ में एंट्री उनके पिता की पुरानी ख्वाहिश पूरी करने जैसी थी।
वर्षा ने बताया कि उन्होंने कभी आवेदन नहीं किया। शो को एक साल हो चुका था। एक दिन परिवार संग सेट पर गईं, जहां छोटे अभिमन्यु की शूटिंग हो रही थी। शादी का सीन नजदीक था। तभी शकुनि यानी गुफी पेंटल ने उन्हें देखा और पूछा, “उत्तरा का रोल करोगी?” माता-पिता की सहमति से रोल पक्का।
उनकी एंट्री नृत्य से हुई, गोपी जी की कथक कोरियोग्राफी ने रातोंरात स्टार बना दिया। इससे हिंदी फिल्मों का रास्ता खुला, पहली फिल्म ‘दूध का कर्ज’ जैकी श्रॉफ संग।
मराठी में सचिन पिलगांवकर ने ‘गंमत जम्मत’ से लॉन्च किया, जो नायिका केंद्रित थी। कई हिट्स दीं। मराठी फिल्में मजबूत कहानी वाली, हिंदी में ग्लैमर फोकस। ‘तिरंगा’, ‘हनीमून’ जैसी फिल्में कीं। गायिका भी हैं, मराठी-हिंदी-कोंकणी में।
वर्षा की कहानी साबित करती है कि किस्मत और प्रतिभा का मेल कमाल करता है।