
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लियो’ का सेंसर बोर्ड विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गया है। फिल्म की रिलीज पर लगी रोक ने पूरे उद्योग को हिलाकर रख दिया है।
लोकेश कनगराज द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर में विजय एक खतरनाक प्रोटेक्टर की भूमिका में हैं, जो हिंसा से भरी दुनिया में जीवित रहने की जद्दोजहद दिखाती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट देते हुए कई कट्स की मांग की, जिसमें हिंसक दृश्यों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। तमिलनाडु के सेंसर बोर्ड ने भी अतिरिक्त कटौती थोप दी।
प्रोड्यूसर्स ने इन फैसलों को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन असफल रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनका तर्क है कि ये कट्स कलात्मक स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का हनन हैं।
फिल्म उद्योग में यह मामला मील का पत्थर साबित हो सकता है। दीवाली पर रिलीज होने वाली ‘लियो’ के लिए थिएटर बुक हो चुके थे, करोड़ों का निवेश दांव पर है। विजय के प्रशंसक सोशल मीडिया पर #JusticeForLeo अभियान चला रहे हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई कर सकता है। यदि फिल्म को हरी झंडी मिली, तो यह सेंसरशिप नियमों में बदलाव ला सकती है। तमिल सिनेमा की वैश्विक उड़ान के इस दौर में ‘लियो’ का फैसला पूरे देश पर असर डालेगा।