
हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक सुभाष घई ने युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए इंस्टाग्राम पर एक प्रभावशाली पोस्ट साझा की। अपनी कालजयी फिल्मों राम-लखन, सौदागर, खलनायक, नायक, परदेस और ताल के पोस्टर्स प्रदर्शित करते हुए उन्होंने कहा कि असली सफलता उसी काम में है जो खुद अपनी ताकत से खड़ा हो सके।
घई ने जोर देकर कहा कि भविष्य में व्यक्ति की पहचान उसके वचनों से नहीं, कर्मों से होगी। काम इतना उत्कृष्ट हो कि वह हर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बने। फिल्में दर्शकों के दिलों में हमेशा जीवित रहती हैं, जबकि फिल्मकार को लगातार बेहतर बनने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि सीखने का सिलसिला कभी न रुके। नई तकनीकों से घबराएं नहीं। विशेष रूप से एआई को उन्होंने ‘तीसरी आंख’ करार दिया। यह नई दिशाएं, विचार और रचनात्मकता को मजबूत बनाने वाला सहायक उपकरण है।
अपने शानदार करियर के बाद घई अब व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल के जरिए नई प्रतिभाओं को तराश रहे हैं। उनका यह संदेश सिनेमा से परे हर क्षेत्र के लिए प्रासंगिक है, जो अनुकूलन और उत्कृष्टता पर जोर देता है।