
बॉलीवुड के उभरते सितारे सिद्धांत चतुर्वेदी ने छोटे शहरों से आने वाले लेखकों की परेशानियों पर खुलकर बोल दिया है। एक हालिया कार्यक्रम में उन्होंने उद्योग की उस कड़वी सच्चाई को बयां किया जो इन प्रतिभाओं को मुख्यधारा से दूर रखती है। गली बॉय से प्रसिद्धि पाने वाले सिद्धांत ने कहा कि नेपोटिज्म और महानगरों के नेटवर्क छोटे शहरों के लेखकों के लिए बड़े रोड़े हैं।
उन्होंने बताया कि जयपुर, लखनऊ या पटना जैसे स्थानों से आने वाले लेखक अपनी जमीनी कहानियां लेकर आते हैं, लेकिन कनेक्शन न होने से उन्हें मौका ही नहीं मिलता। ‘मुंबई के प्रोड्यूसर्स अक्सर क्षेत्रीय बोली या ग्रामीण पृष्ठभूमि को बाजार योग्य नहीं मानते,’ उन्होंने नाराजगी जताई।
सिद्धांत ने अपने अनुभव साझा करते हुए सुझाव दिया कि फिल्ममेकर्स को टियर-2 शहरों में टैलेंट सर्च करना चाहिए। ‘इन लेखकों की प्रामाणिकता हमारी फिल्मों में कमी को पूरा कर सकती है,’ उन्होंने जोर देकर कहा। उनके बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
यह मुद्दा बॉलीवुड के लिए बदलाव का संकेत है। अगर सिद्धांत के शब्दों पर अमल हुआ तो छोटे शहरों की कहानियां बड़ी स्क्रीन पर चमकेंगी। उद्योग को अब विविधता अपनाने का वक्त आ गया है।