
मुंबई। हिंदी सिनेमा की जानी-मानी गायिका श्रेया घोषाल ने हाल ही में भारतीय संगीत की अथाह गहराई और विविधता का अनुभव किया है। दो दशक से अधिक समय से संगीत जगत को अपनी मधुरता से नवाज रही श्रेया के ताजा गाने ‘इंकलाबी जिद्दी’, ‘मातृभूमि’, ‘असलू सिनेमा’, ‘गाना गुंजूर’, ‘ओ माई री’ और ‘थलोड़ी मरायुवथेविदे नी’ ने उनके इस अनुभव को और गहरा किया है।
इन गीतों में देशभक्ति की ललकार से लेकर रिश्तों की नाजुक भावनाएं, लोक धुनों की मिठास और आधुनिक सिनेमा की धाकड़ ऊर्जा तक सब कुछ समाहित है। श्रेया ने कहा, ‘इन अलग-अलग शैलियों के गीत गाना मेरे लिए एक अनमोल सफर रहा। इससे पता चलता है कि हमारा संगीत कितना व्यापक और बहुआयामी है। हर गाना अपनी संस्कृति और कहानी लिए होता है, मगर दिल को छूने वाली भावना ही इसका मूल है।’
गायिका ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘एक कलाकार के रूप में इतनी विविधतापूर्ण कहानियों को आवाज देना बेहद सुखद है। मुझे गर्व है कि मैं भारतीय संगीत की एकता और वैभव को दर्शाने वाले इस यज्ञ का हिस्सा हूं। संगीत सीमाओं से परे होता है, भावनाओं की सत्यता ही इसे श्रोताओं से बांधती है।’
‘डायनामिक्स की रानी’ के नाम से मशहूर श्रेया को ‘बैरी पिया’ और ‘डोला रे डोला’ जैसे गीतों ने राष्ट्रीय पहचान दिलाई। ‘धीरे जलना’, ‘ये इश्क हाय’, ‘फेरारी मोन’, ‘जीव रंगला’ और ‘मायावा थूयावा’ के लिए उन्हें पांच राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई राज्य स्तरीय सम्मान और बीएफजेए अवॉर्ड मिले हैं।
श्रेया का यह बयान तब आया है जब भारतीय संगीत वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों छू रहा है, परंपरा और नवीनता का अनूठा संगम रचते हुए।