
भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में शोभा गुर्टू का नाम अमर है। ठुमरी की रानी के नाम से मशहूर यह कलाकार 8 फरवरी 1925 को कर्नाटक के बेलगांव में पैदा हुईं। जब ठुमरी लुप्त होने की कगार पर थी, तब उन्होंने इसे नई जिंदगी दी।
उनकी मां मेनकाबाई शिरोडकर नृत्यांगना थीं, जिनसे शोभा को प्रारंभिक शिक्षा मिली। बाद में उस्ताद भुर्जी खान और नत्थन खान से ठुमरी, दादरा जैसी विधाओं की बारीकियां सीखीं। उनकी गायकी में भावों का ऐसा समावेश था कि हर गीत जीवंत हो उठता था।
देश-विदेश के मंचों पर उन्होंने ठुमरी को स्थापित किया, जिसमें न्यूयॉर्क का कार्नेगी हॉल भी शामिल है। पंडित बिरजू महाराज के साथ कथक-संगीत के संयोजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
फिल्मों में भी उनकी आवाज ने धूम मचाई। ‘पाकीजा’ का ‘बंधन बांधो’, ‘फागुन’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ के गीत आज भी लोकप्रिय हैं। 1987 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2002 में पद्मभूषण समेत कई सम्मान मिले।
27 सितंबर 2004 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी संगीतमय विरासत आज भी प्रेरणा दे रही है।