
भारतीय सिनेमा के उन सहायक अभिनेताओं में शफी इनामदार का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा है, जिन्होंने अपनी संवेदनशील अदाकारी से दर्शकों के दिल जीत लिए। 13 मार्च को उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके बहुमुखी सफर को याद करते हैं।
23 अक्टूबर 1945 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्मे शफी बचपन से नाटकों के प्रति आकर्षित थे। मुंबई के केसी कॉलेज से शिक्षा ग्रहण करने के बाद गुजराती रंगमंच के दिग्गज प्रवीण जोशी के सानिध्य में उन्होंने करियर की शुरुआत की। बलराज साहनी से प्रेरणा लेकर आईपीटीए से जुड़े। 70 के दशक में पृथ्वी थिएटर्स में कई नाटकों का मंचन व निर्देशन किया। शशि कपूर ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर 1982 की फिल्म ‘विजेता’ में साइन किया। गोविंद निहलानी ने ‘अर्धसत्य’ में महत्वपूर्ण भूमिका दी।
दिलीप कुमार के दीवाने शफी को ‘इज्जतदार’ में उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला। टीवी पर ‘ये जो है जिंदगी’ ने उन्हें घर-घर पहचान दी। बीआर चोपड़ा की फिल्मों में चिरस्थायी छाप छोड़ी। 1995 में निर्देशन के मैदान में उतरकर ‘हम दोनों’ बनाई, जिसमें नाना पाटेकर व ऋषि कपूर थे। पत्नी भक्ति बरुवे अभिनेत्री व न्यूज रीडर थीं।
13 मार्च 1996 को भारत-श्रीलंका वर्ल्ड कप सेमीफाइनल देखते हुए हार्ट अटैक से उनका निधन हुआ। क्रिकेट प्रेमी शफी की विदाई उतनी ही नाटकीय थी जितने उनके किरदार। 2001 में पत्नी का कार हादसे में निधन। शफी के किरदार आज भी जीवंत हैं।