
तमिल सिनेमा के मशहूर निर्देशक सेल्वाराघवन ने हाल ही में जीवन की एक कठोर सच्चाई बयान की, जो लाखों लोगों के दिल को छू गई। उन्होंने कहा, ‘लोगों को दूसरों की मुश्किलों से कोई मतलब नहीं होता।’ यह बयान सामाजिक दिखावे की पोल खोलता है।
एक साक्षात्कार में निर्देशक ने मानव स्वभाव पर गहराई से चर्चा की। ‘कदल कोंडेन’ और ‘7जी रेनबो कॉलोनी’ जैसी फिल्मों के क्रिएटर ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपनी समस्याओं में उलझा रहता है। दोस्तों की परेशानियां सुनते हुए भी मन कहीं और होता है।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के दौर में भी सच्चा साथ दुर्लभ है, यही सेल्वाराघवन की बात का मूल है। उन्होंने उद्योग के अपने अनुभव साझा किए, जहां सहकर्मियों की मुश्किलों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
हालांकि, उन्होंने सलाह भी दी। ‘खुद को पहचानो, तभी दूसरों को समझोगे।’ यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सेल्वाराघवन की यह ईमानदार बात समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित कर रही है। क्या हम वाकई दूसरों के दर्द में शरीक होते हैं?