
बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्में हमेशा से भव्यता और भावनाओं का अनोखा संगम रही हैं। ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘हीरामंडी’ जैसी कृतियों ने दर्शकों को न केवल बॉक्स ऑफिस पर कमाई से प्रभावित किया, बल्कि उनके शानदार सेट्स और किरदारों ने भी दिल जीत लिया।
24 फरवरी को जन्में भंसाली की हर फिल्म क्लासिक पीरियड ड्रामा को जीवंत करती है। उनके सेट इतने भव्य होते हैं कि वे पूरे बॉलीवुड फिल्म के बजट के बराबर खर्च करते हैं। ‘देवदास’ में चंद्रमुखी का कोठा और पारो का महल बनाने में ही 15 करोड़ रुपये लगे। ऊपर से ऐश्वर्या राय के लिए 600 साड़ियां विशेष रूप से डिजाइन की गईं।
भंसाली की फिल्मों का दूसरा बड़ा आकर्षण है महिलाओं का सशक्त चित्रण। चाहे चंद्रमुखी हो, पारो हो या पद्मावती, सभी किरदार मजबूत इरादों वाले दिखते हैं, जबकि पुरुष अक्सर भावुक कमजोरियां दर्शाते हैं।
इसका राज उनकी मां लीला भंसाली से जुड़ा है। संघर्षमयी जीवन में उन्होंने बच्चों का पालन-पोषण किया—कपड़े सिलकर, साड़ियों पर काम करके, छोटे मंचों पर नृत्य करके, लेकिन मुस्कान कभी न हारी। यही हिम्मत भंसाली ने अपनी फिल्मों में महिलाओं को दी।
एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ‘देवदास’ में ऐश्वर्या-माधुरी को दुर्गा रूप में देखा। राज कपूर के प्रशंसक भंसाली उनकी शैली से प्रेरित होकर निर्देशन की दुनिया में आए।
भंसाली की फिल्में न केवल आंखें सरकाती हैं, बल्कि महिलाओं की ताकत को सलाम भी करती हैं।