
अभिनेत्री संदीपा धर इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ के कारण चर्चा में हैं। वे मानती हैं कि बेहतरीन अभिनय का राज मजबूत पटकथा में छिपा है।
हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “अधिकांश जिम्मेदारी लेखन की होती है। अगर पात्र जीवंत और अनोखे लिखे जाएं, तो अभिनेता को केवल उसे निभाना रह जाता है। फिल्मों में सबसे कठिन काम स्क्रीन स्पेस है। कुछ ही दृश्यों में किरदार की पूरी कहानी, संघर्ष और हल दिखाना पड़ता है। इसके लिए गहन अभ्यास और कुशलता अपरिहार्य है।”
संदीपा हर वर्ष जन्मदिन मां वैष्णो देवी के दर्शन के साथ मनाती हैं। “यह मेरी लंबे समय से चली आ रही रस्म है।” उन्होंने बताया। मुंबई की भागदौड़ में पहाड़ी शांति का कोई सानी नहीं। “शायद मेरी जड़ें पहाड़ों से जुड़ी होने के कारण मैं वहां गहरे स्तर पर जुड़ाव महसूस करती हूं।”
जन्मदिन वर्षारंभ में होने से यह उनके आध्यात्मिक सफर की शुरुआत बन जाता है। “वैष्णो देवी से लौटने पर हमेशा शुभ समाचार मिलते हैं।” इस बार फिल्म का थिएटर रिलीज और नेटफ्लिक्स पर आगमन हुआ। “यह माता रानी की कृपा ही है कि मेरे अभिनय की इतनी सराहना हो रही है।”
फिल्म स्वीकृति और आत्म-स्वीकृति पर केंद्रित है। सोशल मीडिया युग में बाहरी मान्यता का दबाव आम है। “हम स्वयं को स्वीकार करने के बजाय दूसरों से तालियां मांगते हैं।” संदीपा ने कहा, “हमें समझना चाहिए कि हम जैसे हैं, वैसे ही पर्याप्त हैं।”
भविष्य में लक्ष्मण उटेकर निर्देशित नेटफ्लिक्स शो ‘चुंबक’ दर्शकों का इंतजार कर रहा है।