
बॉलीवुड में हाल की एक बहस ने संगीतकारों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। ए.आर. रहमान ने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पहले जितने काम के ऑफर नहीं मिल रहे, जिसमें साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह की भूमिका हो सकती है। इस पर सलीम मर्चेंट ने स्पष्ट राय दी है।
आईएएनएस से बातचीत में सलीम ने रहमान का सम्मान जताते हुए कहा, ‘हर कलाकार का सफर अलग होता है। रहमान ने शायद कुछ ऐसी परिस्थितियां देखी हों, लेकिन पूरी इंडस्ट्री को एक ही चश्मे से देखना गलत है।’
उन्होंने ‘रामायण’ का उदाहरण दिया, जो हिंदू महाकाव्य पर बनी महत्वाकांक्षी फिल्म है। ‘इसके संगीत के लिए रहमान को चुना जाना साफ बयान देता है कि उनकी कला का सम्मान है। अगर भेदभाव होता तो ऐसा मौका क्यों मिलता?’
सलीम की यह टिप्पणी बॉलीवुड में समावेशिता पर बहस को नई दिशा दे रही है। रहमान की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं, और ‘रामायण’ इसकी मिसाल बनेगी। इंडस्ट्री आगे बढ़ रही है, जहां टैलेंट ही राज करता है।