
भारतीय टेलीविजन की चहेती अभिनेत्री रश्मि देसाई आज सफलता की बुलंदियों पर हैं, लेकिन उनकी असली कहानी नामों के बदलाव से जुड़ी है। 13 फरवरी 1986 को असम के नागांव में गुजराती परिवार में जन्मी शिवानी ने इंडस्ट्री में कदम रखते ही नाम बदलकर दिव्या रख लिया। फिर किस्मत ने साथ न दिया तो दूसरी बार रश्मि देसाई बनीं, जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
शुरुआती दिनों में दिव्या नाम से प्रोजेक्ट्स मिले, लेकिन ब्रेकआउट नहीं। ज्योतिषी मित्र की सलाह पर नाम बदला, और किस्मत चमक उठी। रश्मि ने फिल्मों से शुरुआत की। 2002 में असमिया फिल्म ‘कन्यादान’ से डेब्यू, उसके बाद भोजपुरी सिनेमा में धूम मचाई। निर्देशक उनकी फीस के लिए लाइन लगा देते थे।
टेलीविजन पर ‘उतरन’ ने उन्हें तपस्या ठाकुर के किरदार से घर-घर पहचान दी। इस नेगेटिव भूमिका ने उन्हें अमर कर दिया। इसके बाद ‘दिल से दिल तक’, ‘नागिन’ और ‘इश्क का रंग सफेद’ जैसे शो आए।
रियलिटी शो में ‘खतरों के खिलाड़ी’ और ‘बिग बॉस 13’ ने उनके संघर्ष, रिश्तों की जटिलताओं को उजागर किया। रश्मि की कहानी साबित करती है कि साहसिक फैसले जीवन बदल सकते हैं।