
हिंदी सिनेमा में तीन दशक पूरे करने पर रानी मुखर्जी ने अपने करियर के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की। ‘मेरे पास फिल्मों के लिए कभी कोई मास्टर प्लान नहीं था,’ उन्होंने कबूल किया। सफलता का राज बताया—जुनून, मेहनत और सही मौके।
1996 में ‘राजा की आएगी बारात’ से करियर की शुरुआत हुई। लेकिन 1997 की ‘गुलाम’ ने उन्हें स्टार बना दिया। आमिर खान के साथ उनका तीखा सीन आज भी याद किया जाता है। ‘कुछ कुछ होता है’ ने रोमांटिक हीरोइन का जलवा दिखाया।
2000 के दशक में ‘साठिया’, ‘हम तुम’, ‘वीर-जारा’, ‘बंटी और बबली’ जैसी सुपरहिट फिल्में आईं। ‘ब्लैक’ में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी अदाकारी ने नेशनल अवॉर्ड दिलाया। विवाह और मातृत्व के बाद ‘मर्दानी’ सीरीज से धमाकेदार कमबैक।
‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ ने ग्लोबल पहचान दी। भविष्य को लेकर उत्साहित रानी बोलीं, ‘नई कहानियां सुनाने का इंतजार है।’ उनका सफर प्रेरणा है कि दिल से किया काम लंबा चलता है।