
शुक्रवार को रानी मुखर्जी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मर्दानी 3’ रिलीज हो गई। यह फिल्म महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि वर्दीधारी महिलाएं अपराध, भय और दबाव से कैसे जूझती हैं।
दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारियों के साथ एक सत्र में रानी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, ‘पुलिस की वर्दी तीसरी बार पहनना मेरे लिए अपार सौभाग्य है। इन महिलाओं का जीवन कठिनाइयों भरा होता है। उनके अपने संघर्ष, अपनी कहानियां और रोजाना चुनौतियां होती हैं। फिर भी अपराध सुलझाने का उनका तरीका अद्भुत है।’
शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार से रानी भारतीय महिला अधिकारियों की निष्ठा दिखाना चाहती हैं। ‘ये महिलाएं दिन-रात कर्तव्य निभाती हैं और समाज की रक्षा करती हैं।’
एक अधिकारी ने पूछा कि 2026 में भी फिल्मों से महिलाओं-बच्चों के मुद्दे सिखाने क्यों जरूरी? रानी बोलीं, ‘गुस्से से ज्यादा महत्वपूर्ण सुधार के कदम हैं। निर्भया स्क्वॉड, दामिनी स्क्वॉड और हेल्पलाइन जैसी पहलें सकारात्मक हैं, जो हर लड़की-बच्चे को मदद सुनिश्चित करती हैं।’
उन्होंने कहा, ‘संघर्ष वैश्विक समस्या है। महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा हर देश की चुनौती। इन प्रयासों से बेहतर भविष्य की आशा करें। बदलाव धीमा लेकिन निश्चित है।’
‘मर्दानी 3’ न केवल मनोरंजन देती है, बल्कि वास्तविक नायिकाओं को सलाम करती है।