
हाल ही में आयोजित एक फिल्म समारोह में बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने सिनेमा की सच्ची भूमिका पर गहन चिंतन व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘अगर फिल्में लोगों को उनकी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ पाती हैं, तो यही सिनेमा की वास्तविक विजय है।’ यह बयान उद्योग में गूंज रहा है।
हाईवे और सराबजी जैसी फिल्मों से प्रसिद्ध हुड्डा ने बताया कि कहानीकारिता कैसे परंपराओं को संरक्षित रखती है। उन्होंने अपने करियर के अनुभव साझा किए, जहां प्रामाणिक परियोजनाओं ने दर्शकों के दिलों को छुआ। ‘बॉक्स ऑफिस से अधिक महत्वपूर्ण है सांस्कृतिक जुड़ाव,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
बॉलीवुड की दिशा पर बहस के बीच हुड्डा ने स्वतंत्र और क्षेत्रीय सिनेमा की सराहना की। पान सिंह तोमर जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए उन्होंने गुणवत्ता पर जोर दिया।
उद्योग से सामूहिक प्रयास की अपील करते हुए हुड्डा ने कहा कि रचनाकारों, निर्माताओं और दर्शकों को मिलकर मूल्यवान कहानियां प्रोत्साहित करनी चाहिए। ‘जब फिल्म मूल्यों पर चिंतन कराए, तभी वह सफल होती है।’ उनके शब्द प्रेरणादायक हैं।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सिनेमा सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है। अपनी आगामी परियोजनाओं से हुड्डा इस दिशा में योगदान देंगे।